
मेरा नाम सुमित है, उम्र 24 साल। शहर से ग्रेजुएशन करने के बाद मैं अपने गाँव वापस आया था और कुछ पॉकेट मनी के लिए ट्यूशन पढ़ाने लगा था। तभी मुझे रिया के घर से बुलावा आया। रिया, शहर के बड़े जमींदार की बेटी, जो 12वीं में पढ़ती थी।
पहले दिन जब मैं उसके घर पहुँचा, तो वो सोफे पर बैठी थी। छोटे शॉर्ट्स और टाइट टी-शर्ट में उसका उभरता हुआ बदन देखकर मेरे हलक में थूक सूख गया।
"नमस्ते सर, मैं रिया," उसने अपनी नशीली आँखों से मुझे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा।
मैंने उसे पढ़ाना शुरू किया, लेकिन उसका ध्यान किताबों पर कम और मेरे हाथों की नसों पर ज़्यादा था। पढ़ाते वक्त जब भी मेरा हाथ उसकी उंगलियों से छू जाता, वो जानबूझकर अपना हाथ नहीं हटाती थी। उसकी आँखों में एक ऐसी बेशर्मी थी जो साफ़ कह रही थी कि उसे 'किताबी ज्ञान' नहीं, बल्कि कुछ और चाहिए।
उस दिन बारिश बहुत तेज़ थी, और घर में सन्नाटा था। रिया ने अपनी कुर्सी मेरे थोड़े और करीब खिसका ली और फुसफुसाकर बोली, "सर, यहाँ बहुत गर्मी लग रही है... क्या मैं अपनी टी-शर्ट का एक बटन खोल लूँ?"
मेरी धड़कनें तेज़ हो गईं। मुझे समझ आ गया था कि ये ट्यूशन क्लास अब सिर्फ पढ़ाई तक नहीं रुकने वाली... 🥵🔥🌚












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